विचार और आप।

विचार और आप।

इस ब्लॉग में हम केवल विचार शब्द पर चर्चा करेगे अच्छे  या बुरे विचार पर नहीं देखेगे कि आखिर ये है क्या ?

हम सब कही न कही किसी न किसी बात पर विचार करते है। और समय समय पर अपनी तर्क शक्ति से अपने अनुचित विचारो को अपनी समस्या के समाधान के लिए प्रयोग में लाते हे।
     अब सवाल उठता है कि क्या हम जो विचार कर रहे हे वो वाकई विचारणीय मुद्दे है भी या नही। आप कैसे किसी भी motivator के  विचारो में अपने आप को सुरक्षित महसूस करते है। आप जो अभी पढ़ रहे हे वो मेरे विचार है। मेरे यह सब कहने का आशय केवल इतना ही था कि हम  सब कही न कही विचारो से घिरे है। बस इसी के साथ में मेरे लेख की प्रस्तावना को विराम देता हूँ।


आज इस नैनो टेक्नोलॉजि के युग में विचार  के कारण ही लगभग सभी आविष्कार हुए हैं। यहाँ मेरा मतलब "आवश्कता ही आविष्कार की जननी है "  को कथन को  गलत करना नहीं है वो तो अपनी जगह सही है लेकिन यहाँ आप समझे इस चीज को की इंसान को आवश्य्कता कब लगेगी , जब वो किसी काम को करने के लिए विचार करेगायानि कही न कही हम ये कह सकते हे की जिस व्यक्ति के विचार जितने उन्नत होगें उसकी  कार्य करने की क्षमता उतनी ही होगी |और उसकी आवश्यकता उतनी बड़ी या ज्यादा होगी|

आईये देखते हे की किसी व्यक्ति के विचार उसकी जिंदगी में, उसकी कार्य क्षमता में व् उसके चरित्र पर क्या प्रभाव दाल रहे है |


 दो दोस्त थे या कहे तो काफी गहरी मित्रत्रा वाले दोस्त आपस में काफी समय के बाद मिले हे , दोनों एक दूसरे को काफी हद तक जानते थे | उनके बिछड़ने के पहले तक दोनों का आपसी समझ काफी हद तक सामान थी |
पर अचानक दोनों दोस्तों कि दोस्ती टूट गयी आखिर उसकी क्या वजह रही होगी आप इस चीज को मन रहे हे कि यह भी एक विचार ही था जो उन्स्की दोस्ती को तोड़न में सहायक रहा होगा | विचार किसी के भ९इ मन में आया हो पर था तो विचार ,
                                    जब उन्होंने दोस्ती कि थी तब भी उनके मन में विचार आया था कि चलो यार में इसे अपना दोस्त बना लू या मन लू |

यानि दोस्तों देखो विचार जहाँ एक और दोस्त बना रहा हे वही दूसरी  और दोस्ती तो टुटवा रहा हे |

देखिये विचार जो की इंसान कि दिमागी पैदावार है अगर मनुष्य चाहे तो इसे नया विचार या पुराना विचार पैदा कर सकता है  

अगर आप इसे आगे पढ़ना चाहते है तो कृपया अपना कॉम्मनेट लिखे और साथ ही आप का विचार इस ब्लॉग को ले कर | 

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